Success Story Of Sundar Pichai- Google CEO

फर्श पर सोकर पहुंचे अर्श तक -गूगल के सीईओ

आज मैं आपको Google के CEO सुन्दर पिचाई की कहानी बताने जा रही हु | Sundar Pichai की कहानी किसी परीकथा से कम नहीं है|

      • सुन्दर पिचाई का जन्म 1972 में चेन्नई (तब के मद्रास) में हुआ था | उनके पिता जी ब्रिटिश कंपनी जीईसी में इंजीनियर थे|
      • उनका परिवार दो कमरों में रहता था| सुन्दर की पढ़ाई का कोई अलग कमरा नहीं था| कमरे इतने छोटे होते थे कि वह अपने छोटे भाई के साथ नीचे जमीन पर सोते थे|
      • न उनके घर कोई टेलीविज़न था न ही कोई कार| कहने का मतलब उन दिनों घर के हालात अच्छे नहीं थे|
      • इंजीनियर पिता ने बचपन में ही अपने बेटे के मन में तकनीक के बीज बो दिए थे| इसलिए 17 वर्ष की उम्र में IIT की प्रवेश परीक्षा पास आकर खड़गपुर में दाखिला लिया| सुन्दर अपनी पढाई के दौरान हमेशा अपने बैच के Toper रहे | सुन्दर को Electronics विषय काफी पसंद था |
      • सुन्दर को याद करते हुए प्रोफेसर राय कहते है वह काफी सभ्य ,विन्रम और मृदुभाषी है |
      • 1993 की फाइनल परीक्षा में सुन्दर ने Batch में टॉप करने के साथ साथ रजत पदक भी हासिल किया है | सुन्दर आगे की पढाई के लिए स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय चले गए थे |
      • IIT से निकलने के बाद उन्होंने 11 साल पहले गूगल में नौकरी शुरू की थी | Sundar Pichai के सहपाठी बताते है कि ‘ गूगल में एक व्यक्ति ऐसा मिलना मुश्किल है जो Sundar Pichai को पसंद न करता हो या उनसे प्रभावित न हो’
      • सुन्दर के सहपाठी पी. सुब्रमण्यम बताते हैं,’सुन्दर के चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती और हम मजाक में उसे किताबी कीड़ा कहते थे |
      • दो कमरों के मकान से निकल कर दुनिया की सबसे प्रमुख तकनीकी कंपनी गूगल के सीईओ बनने तक का सफर किसी परीकथा से कम आकर्षक नहीं|
      • हाल में ही सुन्दर ने चेन्नई में  माता पिता के लिए करोड़ो की लागत वाला मकान खरीदा है|
      • इसी साल जनवरी में पिचाई भारत आए थे सुंदर पिचाई पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में आईआईटी कैंपस में स्टूडेंट्स को संबोधित किया था| पूछा गया थे आने वाले 10 सालों में आप अपने आपको कहा देखते है उन्होंने कहा 10 साल काफी लम्बा समय होता है पता नहीं कहां होऊंगा लेकिन इच्छा यही है की ऐसी चीजें बनाता रहूं जो आगे काम आए|

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