माँ मुझे पढ़ना है

 

माँ मुझे पढ़ना है…

 

गुड़िया – माँ मुझे पढ़ना है आगे बढ़ना है

माँ(गुस्से में बोली) – सुन गुड़िया, चकला -चूल्हा, बेलन सीख | यही तेरी दुनिया है।

गुड़िया – नहीं माँ, मुझे पढ़ना है आगे बढ़ना है |

माँ– क्या करेगी तू पढ़ लिखकर , तू कौन से देश का नाम कमाएगी। तू चकला -चूल्हा संभालना सीख, तभी आगे जाकर ससुराल वालों का दिल जीत पाएगी ।

गुड़िया- नहीं माँ , पढ़ाई के अनेक फायदे है सुन माँ… जब मैं पढ़ लिख लुंगी मुझसे कोई दुगना पैसा नहीं वसूलेगा, जब मैं हिसाब किताब करना सीख जाऊंगी तब कोई जमींदार मुझे कम मजदूरी नहीं देगा और न ही ज्यादा काम कराएगा । माँ तू देखना फिर हम ठाठ बाट से रहेंगे । सारे सुख अपने हो जाएंगे|

माँ(थोड़ी घबराई हुए)-ना ना गुड़िया। तुझे कोई जरुरत नहीं पढ़ाई लिखाई की। बाहर की दुनिया बहुत गन्दी है। बड़े बड़े राक्षस बैठे है बाहर। तुझे दबोच लेंगे अपने चंगुल में। तू घर के काम काज सीख ले| तेरे लिए अच्छा सा लड़का देखकर शादी कर देंगे|

गुड़िया– माँ तुम कौन से जमाने में जी रही हो| औरत अंतरिक्ष में पहुँच चुकी है , देश की बागडोर संभाल रही है ।दुनिया उस पर नाज कर रही है और तुम मेरी शादी करा देना चाहती हो। मुझे मत रोक पढ़ने दे माँ । मुझे अनपढ़ होकर नहीं जीना। माँ जब मैं पढ़ लिख लुंगी तो देखियो तू चमत्कार… एक दिन तू ही बोलेगी सुनो देश के पुरुषोसुन लो, यह है मेरी बेटी गुड़िया ।

माँ(आँखों में आंसू )– गुड़िया तू सही कह रही है तू पढ़.. तू आगे बढ़.. तू अंतरिक्ष की उड़ान भर| तू अपने सपनो का साकार कर |

गुड़िया( ख़ुशी से झूलते हुए ) – माँ, तू बहुत अच्छी है| तू देखना माँ.. एक दिन दुनियां बोलेगी देखो गुड़िया की माँ जा रही है|

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