दिमाग को असंतुलित करता है फेसबुक

क्या आप जानते है दिमाग को असंतुलित करता है फेसबुक ?

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हम सबको पता है कि हम शायद बहुत ज्यादा फेसबुक use कर रहे है| हम यह सब सोशल मीडिया चैनल्स तो use कर रहे है क्या आप जानते है कि हमारा दिमाग कितना अंसतुलित रहता है इन सब चीजों से | हम सुबह उठते  Facebook देखते है घर से निकलते है फेसबुक देखते है ऑफिस पहुंचे फेसबुक देखा , शाम को ऑफिस से निकले फेसबुक देखा. यहाँ तक अब यह होने भी लगा की हम  Family के साथ बैठे है तो बात करते करते भी हमारी उंगलियां  फ़ोन पर चल रही होती है यहाँ तक की खाना खाते वक़्त भी |

क्या आपको लगता है यह सब सही है  ..कितने बुरा प्रभाव पड़ता है हमारे दिमाग पर इन Social Media Channels से | अगर आप ऐसा करते रहे तो हो सकता है आपको आगे जाकर शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़े | मैं यही नहीं कह रही की आप सोशल मीडिया का use मत कीजिये| मेरा कहने का मतलब है फेसबुक use कीजिये पर एक Limit में | जिस से आपके दिमाग का संतुलन न बिगड़े|

अगर आप ऐसा कर रहे है तो संभल जाएँ| ऐसा देखा गया है कि व्यक्ति Office में हो या Meeting में हो या गाडी चला रहे हो …हम बीच बीच में से बार अपना Facebook चेक करते है । यह आदत आपके दिमाग की दो व्यवस्थाओं के बीच असुंतलन का कारण बन सकती है ।

शोधकर्ताओं ने बताया है कि किसी तरह का फैसला लेते समय दिमाग में दो तरह की व्यवस्थाएं काम करती है। इसमें पहली व्यवस्था  तात्कालिक फैसले की होती है यह किसी परिस्थिति के आधार पर व्यक्ति तुरंत फैसला करने में सक्षम बनाती है। अचानक कुछ देखने या सोशल मीडिया के आधार पर व्यक्ति फैसला लेता है

वहीं दूसरी अवस्था, वस्तुगत निर्णय में काम आती है।जैसे गाड़ी की गति को नियंत्रित रखना और रास्ते पर ध्यान बनाए रखना। इसमें व्यक्ति  पूरी तरह सोच विचारकर फैसला लेता है।

गाडी चलाने , मीटिंग में होना और ऐसे ही निश्चित गतिविधियों के बीच बार बार सोशल मीडिया या फेसबुक चेक करना| दिमाग की इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच असंतुलन बना सकता है।

यह आदत व्यक्ति को सामान्य परिस्थितियों में भी फैसले लेने में अक्षम कर सकती है। इसलिए हमें कई चीजों को ध्यान में रखते हुए फेसबुक का Use करना चाहिए |

अगर आपको मेरी पोस्ट पसंद आई  तो शेयर करे , कमेंट करें या आप कुछ सलाह देना चाहते है तो वो भी अवश्य  दे|

 

One thought on “दिमाग को असंतुलित करता है फेसबुक

  • April 10, 2017 at 3:19 am
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    nice article

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